सूर्य षष्ठी व्रत कथा | Surya Shashti Vrat Katha

दोस्तों आज हम आपके लिए लेकर आये हैं सूर्य षष्ठी व्रत कथा PDF / Surya Shashti Vrat Katha Hindi PDF अपलोड किया हैं। सूर्य देव की उपासना और व्रत हमेशा निरोग रखने के लिए की जाती है। इस दिन को सूर्य षष्ठी या ललिता षष्ठी भी कहा जाता है। सूर्य षष्ठी व्रत पर सूर्य देव की पूजा होती है। पुराणों में भी इस व्रत का जिक्र करते हुए कहा गया है कि जो इस दिन के व्रत से भगवान सूर्य को प्रसन्न करता है उसके तेज में कई गुना वृद्धि होती है और वह निरोग होता है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को ये व्रत रखा जाता है। यहाँ से आप Chhat Vrat Katha Hindi PDF / छठ व्रत कथा PDF मुफ्त में बड़ी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

सूर्य षष्ठी व्रत कथा PDF | Surya Shashti Vrat Katha Hindi PDF

कथा के अनुसार प्रियव्रत नाम के एक राजा थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस बात से राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस बात से राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे. उन्होंने एक दिन संतान प्राप्ति की इच्छा से महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया. इस यज्ञ के फलस्वरूप रानी गर्भवती हो गईं.
नौ महीने बाद संतान सुख को प्राप्त करने का समय आया तो रानी को मरा हुआ पुत्र प्राप्त हुआ. इस बात का पता चलने पर राजा को बहुत दुख हुआ. संतान शोक में वह आत्म हत्या का मन बना लिया. लेकिन जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने की कोशिश की उनके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हुईं.
देवी ने राजा को कहा कि मैं षष्टी देवी हूं. मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं. इसके अलावा जो सच्चे भाव से मेरी पूजा करता है, मैं उसके सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण कर देती हूं. यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करूंगी. देवी की बातों से प्रभावित होकर राजा ने उनकी आज्ञा का पालन किया.
राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि के दिन देवी षष्टी की पूरे विधि -विधान से पूजा की. इस पूजा के फलस्वरूप उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई. तभी से छठ का पावन पर्व मनाया जाने लगा.

कैसे रखें सूर्य षष्ठी का व्रत | Surya Shasti Vrat Vidhi

भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को ये व्रत रखा जाता है। इसके लिए व्रती को एक दिन पूर्व से सामान्य भोजन करना होता है। इसके बाद व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सूर्य देव को शुद्ध मन से जल समर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही आपका व्रत शुरू हो जाता है। भगवान सूर्य को अर्ध्य देने के अलावा धूप, दीप, कपूर, लाल पुष्प आदि से उनका पूजन करना चाहिए।
इस दिन स्नान के पश्चात सात प्रकार के फलों, चावल, तिल, दूर्वा, चंदन आदि को जल में मिलाकर उगते हुए भगवान सूर्य को जल देने का भी प्रावधान पुराणों में देखा गया है। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सूर्य मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए।
क्या है सूर्य उपासना का मंत्र: भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए। “ऊँ घृणि सूर्याय नम:” अथवा “ऊँ सूर्याय नम:”
लाल रंग का है खास महत्व: बताया जाता है कि सूर्य देव को लाल रंग से खास स्नेह है। इस कारण अगर व्रत करने वाला लाल रंग का पुष्प उन्हें अर्पित करता है या लाल वस्त्र आदि दान करता है तो भगवान इससे प्रसन्न होते हैं। वहीं इस व्रत में डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर ही व्रत का पारण कर दिया जाता है। पर खास बात का ख्याल ये रखा जाता है कि व्रत तोड़ने के पश्चात भी नमक का सेवन वर्जित माना जाता है।

छठ व्रत पूजा विधि

छठ देवी भगवान सूर्यदेव की बहन हैं। जिनकी पूजा के लिए छठ मनाया जाता है। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। छठी मैया का ध्यान करते हुए लोग मां गंगा-यमुना या किसी नदी के किनारे इस पूजा को मनाते हैं। इसमें सूर्य की पूजा अनिवार्य है साथ ही किसी नदी में स्नान करना भी।
इस पर्व में पहले दिन घर की साफ सफाई की जाती है। छठ पर्व पर गांवों में अधिक सफाई देखने को मिलती है। छठ के चार दिनों तक शुद्ध शाकाहारी भोजन किया जाता है, दूसरे दिन खरना का कार्यक्रम होता है, तीसरे दिन भगवान सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन भक्त उदियमान सूर्य को उषा अर्घ्य देते हैं।
छठ के दिन अगर कोई व्यक्ति व्रत को करता है तो
वह अत्यंत शुभ और मंगलकारी होता है। पूरे भक्तिभाव और विधि विधान से छठ व्रत करने वाला व्यक्ति सुखी और साधनसंपन्न होता है। साथ ही निःसंतानों को संतान प्राप्ति होती है।

छठ व्रत अनुष्ठान विधि

  • छठ के दिन सूर्योदय में उठना चाहिए।
  • व्यक्ति को अपने घर के पास एक झील, तालाब या नदी में स्नान करना चाहिए।
  • स्नान करने के बाद नदी के किनारे खड़े होकर सूर्योदय के समय सूर्य देवता को नमन करें और विधिवत पूजा करें।
  • शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सूर्य को धुप और फूल अर्पण करें।
  • छठ पूजा में सात प्रकार के फूल, चावल, चंदन, तिल आदि से युक्त जल को सूर्य को अर्पण करें।

सर झुका कर प्रार्थना करते हुए  घृणिं सूर्याय नमः, घृणिं सूर्य: आदित्य:, ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा,
या फिर सूर्याय नमः 108 बार बोलें।
अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं।
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