श्री पुरुषोत्तम देव आरती | Purushottam Maas Aarti

नमस्कार मित्रों !
यहाँ हम प्रस्तुत कर रहे हैं श्री पुरुषोत्तम देव की आरती जिसके गायन से जातक अनेक प्रकार के दुःख व समस्याओं से छुटकारा पा सकता है। हिन्दू धर्म में अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग होता है जिसमें 32 माह 16 दिन 8 घंटे के अंतर से अधिक मास का निर्माण होता है। अधिक मास को खरमास, मलमास तथा पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य वर्ष 365 दिन 6 घंटे का होता है जबकि चंद्र वर्ष 354 का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच तकरीबन 11 दिनों का अंतर होता है। यह अंतर हर 3 वर्ष में करीब एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को दूर करने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त चंद्र मास आता है जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिक मास का नाम दिया गया है। इस समयावधि में अनेक प्रकार के धर्म-कर्म आदि किये जाते हैं। इस माह में विशेषतः श्री सत्यनारायण कथा का आयोजन करने से भी विभिन्न प्रकार के कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है।

श्री पुरुषोत्तम देव आरती लिरिक्स | Purushottam Maas Aarti Lyrics in Hindi :

 

जय पुरुषोत्तम देवा,स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा।

महिमा अमित तुम्हारी,सुर-मुनि करें सेवा॥

जय पुरुषोत्तम देवा॥

सब मासों में उत्तम,तुमको बतलाया।

कृपा हुई जब हरि की,कृष्ण रूप पाया॥

जय पुरुषोत्तम देवा॥

पूजा तुमको जिसनेसर्व सुक्ख दीना।

निर्मल करके काया,पाप छार कीना॥

जय पुरुषोत्तम देवा॥

मेधावी मुनि कन्या,महिमा जब जानी।

द्रोपदि नाम सती से,जग ने सन्मानी॥

जय पुरुषोत्तम देवा॥

विप्र सुदेव सेवा कर,मृत सुत पुनि पाया।

धाम हरि का पाया,यश जग में छाया॥

जय पुरुषोत्तम देवा॥

नृप दृढ़धन्वा पर जब,तुमने कृपा करी।

व्रतविधि नियम और पूजा,कीनी भक्ति भरी॥

जय पुरुषोत्तम देवा॥

शूद्र मणीग्रिव पापी,दीपदान किया।

निर्मल बुद्धि तुम करके,हरि धाम दिया॥

जय पुरुषोत्तम देवा॥

पुरुषोत्तम व्रत-पूजाहित चित से करते।

प्रभुदास भव नद सेसहजही वे तरते॥

जय पुरुषोत्तम देवा॥

 

श्री पुरुषोत्तम देव आरती विधि / Purushottam Maas Aarti Vidhi in Hindi :

  • सबसे पहले गुरुवार के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें. उसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • एक लकड़ी की चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • विष्णु जी को पीली वस्तुएं अत्याधिक प्रिय है. इसलिए भगवान विष्णु को पीले फूल और पीले फल का भोग अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु जी के समक्ष धूप व दीप प्रज्वल्लित करें।
  • अब श्री पुरुषोत्तम देव की आरती का गायन करें।
  • गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। अतः इस दिन केले के वृक्ष की पूजा अवश्य करें।

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