मार्गशीर्ष चतुर्थी पूजा विधि | Margashirsha Chauth Puja Vidhi

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप मार्गशीर्ष चतुर्थी पूजा विधि / Margashirsha Chauth Puja Vidhi PDF प्राप्त कर सकते हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण जी के कहने पर महाराज युधिष्ठर जी ने भी इस व्रत को किया था। भगवान् श्री कृष्ण जी ने युधिष्ठर जी से कहा था कि, इस व्रत के प्रभाव से आप क्षणभर में अपने शत्रुओं को जीतकर सम्पूर्ण राज्य के अधिकारी बनेंगे।
भगवान कृष्ण का वचन सुनकर युधिष्ठर ने गणेश चतुर्थी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से वे अपने शत्रुओं को जीतकर राज्य के अधिकारी बन गए। यदि आप भी अपने जीवन में बहुत कुछ खो चुके हैं, तो इस व्रत का पालन अवश्य करें तथा प्रभु की कृपा प्राप्त कर अपना जीवन सफल बनाएं।

मार्गशीर्ष चतुर्थी पूजन विधि | Margashirsha Chaturthi Pujan Vidhi

  • प्रात: काल उठकर नित्य कर्म से निवृत हो, शुद्ध हो कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
  •  श्री गणेश जी का पूजन पंचोपचार (धूप,दीप, नैवेद्य,अक्षत,फूल) विधि से करें।
  • इसके बाद हाथ में जल तथा दूर्वा लेकर मन-ही-मन श्री गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें:-
  • “मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायक पूजनमहं करिष्ये”
  • अब कलश में जल भरकर उसमें थोड़ा गंगा जल मिलाएं।
  • कलश में दूर्वा, सिक्के, साबुत हल्दी रखें।
  • उसके बाद लाल कपड़े से कलश का मुख बांध दें।
  • कलश पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • पूरे दिन श्री गणेशजी के मंत्र का स्तवन करें।
  • संध्या को दुबारा स्नान कर शुद्ध हो जाएं।
  • श्री गणेश जी के सामने सभी पूजन सामग्री के साथ बैठ जाएं।
  • विधि-विधान से गणेश जी का पूजन करें।
  • वस्त्र अर्पित करें।
  • नैवेद्य के रूप में 10 लड्डु अर्पित करें।
  • चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रमा की पूजा कर अर्घ्य अर्पण करें।
  •  उसके बाद गणेश चतुर्थी की कथा सुनें अथवा सुनाएं।
  •  जौ, चावल, चीनी, तिल व घी से हवन करें ।
  •  तत्पश्चात् गणेश जी की आरती करें।
  •  5 लड्डु प्रसाद के रूप में बांट दें और शेष 5 अगले दिन ब्राह्मण को दान में दें।

श्री गणेश गायत्री मंत्र | Ganesh Gayatri Mantra Lyrics

एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

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